Saturday, October 30, 2010

आँखों में रह लिए

इस दिल का धड़कना क्या कहिये
हम आप की आँखों में रह लिए
अब आप कहीं भी जा रहिये
इस दिल का धड़कना क्या कहिये

सारी रात नहीं कहीं चैन इसे
सारे दिन भी धड़कता रहता है
सारी सुबहें कहीं छुप जाएँ मगर
शामों को नज़र में ही तहिये
इस दिल का धड़कना क्या कहिये

मैं तो रोती रहूँ जब देखूं तुझे
सब नज़ारे नज़र में भरते हैं
हम यहाँ हैं वहां हैं आप खड़े
यूँ दर्दे जिगर फिर क्यूँ सहिये
इस दिल का धड़कना क्या कहिये

अब चाहिए नहीं कुछ भी हमें
देखा है हमने जब से तुम्हें
हमें मिलता रहे अहसास यूँही
खूं बन के मेरी रग में बहिये
इस दिल का धड़कना क्या कहिये

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