Saturday, October 23, 2010

दोस्ती

मेरी चाहत से दोस्ती करके
क्या मिला ऐसी दिल्लगी करके

मेरी आँखों में जो आंसू हैं तो खुदा की कसम
आप रोयेंगे ये हंसी करके

हमने सोचा था खुश रहेंगे तुम्हें पाके मगर
रो रहे हैं ये आशिकी करके

तुमको समझा था खुदा तो हमें सजा ये मिली
टूटे पत्थर की बंदगी करके

तुमसे मिलने के पहले मरने की तमन्ना थी
पहली ख्वाहिश को आखिरी करके

बैठे इस आस में कि कोई तो दफ्न कर दे हमें
खत्म हम अपनी जिंदगी करके।

15 comments:

  1. बेहद ही खुबसूरत और मनमोहक…
    आज पहली बार आना हुआ पर आना सफल हुआ बेहद प्रभावशाली प्रस्तुति
    बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

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  2. बहुत ही सुन्‍दर प्रभावशाली प्रस्तुति|

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  3. तुमको समझा था खुदा तो हमें सजा ये मिली
    टूटे पत्थर की बंदगी करके

    बहुत सुन्दर .....

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  4. स्वागत है
    अच्छी पोस्ट
    शुभकामनाएं

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  5. july se likhna shuru kiya lekin itni der se ise chitthajagat se joda? khair der aaye durust aaye....

    swagat hai shubhkamnao ke sath.... jald az jald jyada se jyada log aapne blog ko jane aur manein...


    shubhkamnayein

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  6. ब्लाग जगत की दुनिया में आपका स्वागत है। आप बहुत ही अच्छा लिख रहे है। इसी तरह लिखते रहिए और अपने ब्लॉग को आसमान की उचाईयों तक पहुंचाईये मेरी यही शुभकामनाएं है आपके साथ
    ‘‘ आदत यही बनानी है ज्यादा से ज्यादा(ब्लागों) लोगों तक ट्प्पिणीया अपनी पहुचानी है।’’
    हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

    मालीगांव
    साया
    लक्ष्य

    हमारे नये एगरीकेटर में आप अपने ब्लाग् को नीचे के लिंको द्वारा जोड़ सकते है।
    अपने ब्लाग् पर लोगों लगाये यहां से
    अपने ब्लाग् को जोड़े यहां से

    कृपया अपने ब्लॉग पर से वर्ड वैरिफ़िकेशन हटा देवे इससे टिप्पणी करने में दिक्कत और परेशानी होती है।

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  7. तुमको समझा था खुदा तो हमें सजा ये मिली
    टूटे पत्थर की बंदगी करके

    khubsurat sher achhe lage

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  8. बहुत खूब - प्रशंसनीय प्रस्तुति

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  9. इस नए और सुंदर से चिट्ठे के साथ हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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  10. कमाल का. जारी रहें.
    --
    धनतेरस व दिवाली की सपरिवार बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएं.
    -
    वात्स्यायन गली

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  11. शानदार प्रयास बधाई और शुभकामनाएँ।

    एक विचार : चाहे कोई माने या न माने, लेकिन हमारे विचार हर अच्छे और बुरे, प्रिय और अप्रिय के प्राथमिक कारण हैं!

    -लेखक (डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश') : समाज एवं प्रशासन में व्याप्त नाइंसाफी, भेदभाव, शोषण, भ्रष्टाचार, अत्याचार और गैर-बराबरी आदि के विरुद्ध 1993 में स्थापित एवं 1994 से राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली से पंजीबद्ध राष्ट्रीय संगठन-भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान- (बास) के मुख्य संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। जिसमें 05 अक्टूबर, 2010 तक, 4542 रजिस्टर्ड आजीवन कार्यकर्ता राजस्थान के सभी जिलों एवं दिल्ली सहित देश के 17 राज्यों में सेवारत हैं। फोन नं. 0141-2222225 (सायं 7 से 8 बजे), मो. नं. 098285-02666.
    E-mail : dplmeena@gmail.com
    E-mail : plseeim4u@gmail.com
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