हर दर्द यूँही पी लेंगे हम लोग ऐसे भी जी लेंगे
जब उठने लगेगी उंगली तो अपने होंठों को सी लेंगे
हर दर्द यूँही पी लेंगे हम लोग ऐसे भी जी लेंगे
मैं अपनी कहूँ तू अपनी सुना हम इक दूजे के खैरख्वाह
बस इक दूजे से भूली बिसरी कही सुनी बीती लेंगे
हर दर्द यूँही पी लेंगे हम लोग ऐसे भी जी लेंगे
न तेरी सुनने वाला कोई न मेरी सुनने वाला कोई
हर गम में हर मुश्किल में भी इक दूजे की सुध हम ही लेंगे
हर दर्द यूँही पी लेंगे हम लोग ऐसे भी जी लेंगे
Saturday, May 28, 2011
Tuesday, May 24, 2011
दीवानगी
मेरी दीवानगी नज़र आये
तेरी जब ये नज़र जिधर जाए
फूल बनके मैं खिलूँ जिस रंग का
रंग तुझमें सभी उतर जाये
मेरी दीवानगी नज़र आये
मैं लगूं आसमां जमीं तुझको
तू जो देखे कभी कहीं मुझको
चाहे रब ने बनाया जैसा भी
रूप मेरा तभी संवर जाए
तेरी जब ये नज़र जिधर जाए
मुझसे हो जिंदगी बसर तेरी
मैं बनूँ हाँ के रहगुजर तेरी
तेरा जब साथ मिले तुझ सी ही
मेरी भी जिंदगी गुजर जाए
मेरी दीवानगी नज़र आये
तेरी जब ये नज़र जिधर जाए
फूल बनके मैं खिलूँ जिस रंग का
रंग तुझमें सभी उतर जाये
मेरी दीवानगी नज़र आये
मैं लगूं आसमां जमीं तुझको
तू जो देखे कभी कहीं मुझको
चाहे रब ने बनाया जैसा भी
रूप मेरा तभी संवर जाए
तेरी जब ये नज़र जिधर जाए
मुझसे हो जिंदगी बसर तेरी
मैं बनूँ हाँ के रहगुजर तेरी
तेरा जब साथ मिले तुझ सी ही
मेरी भी जिंदगी गुजर जाए
मेरी दीवानगी नज़र आये
Saturday, May 14, 2011
एहसास
जब मन थकता है तब यूँही
तुम आ जाते हो पास मेरे
और दर्द के पल बन जाते हो
सबसे मीठे एहसास मेरे
मुझे थामते हो गिरने से पहले
जैसे प्रीत को थामे मन
और जब बसते हो साँसों में
सब मिट जाती मेरी उलझन
आना क्या और जाना क्या
हर पल रहते तुम साथ मेरे
और दर्द के पल बन जाते हो
सबसे मीठे एहसास मेरे
तुम आ जाते हो पास मेरे
और दर्द के पल बन जाते हो
सबसे मीठे एहसास मेरे
मुझे थामते हो गिरने से पहले
जैसे प्रीत को थामे मन
और जब बसते हो साँसों में
सब मिट जाती मेरी उलझन
आना क्या और जाना क्या
हर पल रहते तुम साथ मेरे
और दर्द के पल बन जाते हो
सबसे मीठे एहसास मेरे
Thursday, May 5, 2011
बदनाम
तुम्हें याद करना अब तो ये काम हो गया है
दीवाना दिल मुफ्त में बदनाम हो गया है
हमने तो देखा था आँखें उठा के भर
दिल में तुम्हारा इन्तेजाम हो गया है
दीवाना दिल मुफ्त में बदनाम हो गया है
बनकर जो चाह घूमें 'अनाम' ही हम
मजनू मगर अपना नाम हो गया है
दीवाना दिल मुफ्त में बदनाम हो गया है
रस्ते देखे थे जितने भी अब तक सबपे
चर्चा हमारा ही आम हो गया है
दीवाना दिल मुफ्त में बदनाम हो गया है।
दीवाना दिल मुफ्त में बदनाम हो गया है
हमने तो देखा था आँखें उठा के भर
दिल में तुम्हारा इन्तेजाम हो गया है
दीवाना दिल मुफ्त में बदनाम हो गया है
बनकर जो चाह घूमें 'अनाम' ही हम
मजनू मगर अपना नाम हो गया है
दीवाना दिल मुफ्त में बदनाम हो गया है
रस्ते देखे थे जितने भी अब तक सबपे
चर्चा हमारा ही आम हो गया है
दीवाना दिल मुफ्त में बदनाम हो गया है।
Sunday, May 1, 2011
राम जी
मेरा राम जी के मंदिर में जाना जरूरी
राम जी की मैं हूँ सिया
राम जी बिना न लागे हिया
राम नाम का प्रसाद पाना जरूरी
मेरा राम जी के मंदिर में जाना जरूरी
राम जी की मैं छोटी भक्तिन
राम जी को मेरा तन-मन है अरपन
राम जी का मेरे मन में छाना जरूरी
मेरा राम जी के मंदिर में जाना जरूरी
राम जी की मैं हूँ सिया
राम जी बिना न लागे हिया
राम नाम का प्रसाद पाना जरूरी
मेरा राम जी के मंदिर में जाना जरूरी
राम जी की मैं छोटी भक्तिन
राम जी को मेरा तन-मन है अरपन
राम जी का मेरे मन में छाना जरूरी
मेरा राम जी के मंदिर में जाना जरूरी
Friday, April 22, 2011
रहते हैं कहीं हम
रहते हैं कहीं हम आँखों में
छुपते हैं कभी हम साँसों में
तुम सामने होते हो जिस दम
होते हैं हसीं हम लाखों में
हम हो जाते हैं फ़िदा तुमपे
जब हैं होते तुम्हारी बातों में
रहते हैं कहीं हम आँखों में
हम बेल हैं तुम मेरा हो वो सहारा
जिन्हें ढूंढ़ते हैं हम शाखों में
रहते हैं कहीं हम आँखों में
तुम हमको छोड़ना भी न कभी
के बदल जायेंगे हम राखों में
रहते हैं कहीं हम आँखों में
छुपते हैं कभी हम साँसों में
तुम सामने होते हो जिस दम
होते हैं हसीं हम लाखों में
हम हो जाते हैं फ़िदा तुमपे
जब हैं होते तुम्हारी बातों में
रहते हैं कहीं हम आँखों में
हम बेल हैं तुम मेरा हो वो सहारा
जिन्हें ढूंढ़ते हैं हम शाखों में
रहते हैं कहीं हम आँखों में
तुम हमको छोड़ना भी न कभी
के बदल जायेंगे हम राखों में
रहते हैं कहीं हम आँखों में
Wednesday, April 13, 2011
जिन्दगी क्या है
मुझसे कोई इतना सा मजा भी हो पूछा जाये
जिंदगी क्या है कई शौक़ ये कहा जाये
फिर मेरा शौक़ क्यों औरों से न सहा जाए
मुझसे कोई इतना सा मजा भी हो पूछा जाये
मैंने जब भी रखा है हाथ किसी चाहत पर
सबने बस ठोकरें दीं हैं मुझे आहत कर
जिंदगी क्या है कई शौक़ क्यों कहा जाये
मुझसे कोई इतना सा मजा भी हो पूछा जाये
मुझसे दिल ने कहा जब भी,' वो तेरी मंजिल है।'
मांग लूं मैं जो, मुझे क्या 'वो' कभी हासिल है ?
हम तो हर वक़्त बस इक गम का ही पता पाए
मुझसे कोई इतना सा मजा भी हो पूछा जाये
जिंदगी क्या है कई शौक़ ये कहा जाये
फिर मेरा शौक़ क्यों औरों से न सहा जाए
मुझसे कोई इतना सा मजा भी हो पूछा जाये
मैंने जब भी रखा है हाथ किसी चाहत पर
सबने बस ठोकरें दीं हैं मुझे आहत कर
जिंदगी क्या है कई शौक़ क्यों कहा जाये
मुझसे कोई इतना सा मजा भी हो पूछा जाये
मुझसे दिल ने कहा जब भी,' वो तेरी मंजिल है।'
मांग लूं मैं जो, मुझे क्या 'वो' कभी हासिल है ?
हम तो हर वक़्त बस इक गम का ही पता पाए
मुझसे कोई इतना सा मजा भी हो पूछा जाये
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