Monday, August 8, 2011

आज़ादी

किस आज़ादी की बात करते हैं हम? आज़ाद देश कहाँ जा रहा है किसी को फिकर है? तकरीबन ग्यारहवीं शताब्दी से भारत गुलाम था जिस पर इंग्लिश शासन ने सोलहवीं शताब्दी में अपनी नज़र डाली और उन्नीसवीं सदी तक इसे पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया जिससे भारत को १५ अगस्त १९४७ को स्वतंत्रता भी मिल गई पर इस बीच कहाँ है नारी समाज जो आज भी स्वतंत्र है इसमें शक है। स्त्रियों को अपनी सोच के अनुसार न चलने देना, उनकी पढाई पर अभी भी परिवार वालों द्वारा रोक, बेटी को गर्भ में ही मार डालना और येन केन प्रकारेण यदि पैदा हो जाये तो पैदा होते ही उसे मार डालना, भाइयों से भेदभाव सहन करना अभी भी बहुत जगहों पर स्त्री जाति की मजबूरी है। अलग-अलग जगहों पर स्त्रियाँ अलग-अलग प्रकार से पुरुषों द्वारा और सच कहूँ तो स्त्रियों द्वारा भी शोषण का शिकार बनती हैं। स्त्रियों का खुद से बेहतर होना पुरुष वर्ग अपनी तौहीन मानता है जिसके लिए उन्हें किसी न किसी बहाने से नीचा दिखाने की कोशिश करता है यह न तो एक स्वस्थ मानसिकता है न ही स्वतंत्र। फिर भी भारत आज़ाद है तो बधाई है इस आज़ादी की। जिस आज़ादी के लिए स्त्रियों ने भी पुरुषों के कंधे से कन्धा मिलाया भले उनकी संख्या कम रही हो बधाई है इस आज़ादी की।

Tuesday, May 31, 2011

शाम

शाम उठती है शाम आती है
रातों में छम-छम शाम चलती है
दिन में सोती है दिन गुजरता है
शाम उठती है शाम आती है

शाम गुलाबी है शाम शराबी है
यौवन ही शाम की खराबी है
चाँद आके जो दस्तक देता है
शाम उठती है शाम आती है

शाम रंगीन है शाम तस्कीन है
सबकी दुआओं में शाम आमीन है
महफ़िल का जब भी समां बंधता है
शाम उठती है शाम आती है

Saturday, May 28, 2011

दर्द

हर दर्द यूँही पी लेंगे हम लोग ऐसे भी जी लेंगे
जब उठने लगेगी उंगली तो अपने होंठों को सी लेंगे
हर दर्द यूँही पी लेंगे हम लोग ऐसे भी जी लेंगे

मैं अपनी कहूँ तू अपनी सुना हम इक दूजे के खैरख्वाह
बस इक दूजे से भूली बिसरी कही सुनी बीती लेंगे
हर दर्द यूँही पी लेंगे हम लोग ऐसे भी जी लेंगे

न तेरी सुनने वाला कोई न मेरी सुनने वाला कोई
हर गम में हर मुश्किल में भी इक दूजे की सुध हम ही लेंगे
हर दर्द यूँही पी लेंगे हम लोग ऐसे भी जी लेंगे

Tuesday, May 24, 2011

दीवानगी

मेरी दीवानगी नज़र आये
तेरी जब ये नज़र जिधर जाए
फूल बनके मैं खिलूँ जिस रंग का
रंग तुझमें सभी उतर जाये
मेरी दीवानगी नज़र आये

मैं लगूं आसमां जमीं तुझको
तू जो देखे कभी कहीं मुझको
चाहे रब ने बनाया जैसा भी
रूप मेरा तभी संवर जाए
तेरी जब ये नज़र जिधर जाए

मुझसे हो जिंदगी बसर तेरी
मैं बनूँ हाँ के रहगुजर तेरी
तेरा जब साथ मिले तुझ सी ही
मेरी भी जिंदगी गुजर जाए
मेरी दीवानगी नज़र आये

Saturday, May 14, 2011

एहसास

जब मन थकता है तब यूँही
तुम आ जाते हो पास मेरे
और दर्द के पल बन जाते हो
सबसे मीठे एहसास मेरे

मुझे थामते हो गिरने से पहले
जैसे प्रीत को थामे मन
और जब बसते हो साँसों में
सब मिट जाती मेरी उलझन
आना क्या और जाना क्या
हर पल रहते तुम साथ मेरे
और दर्द के पल बन जाते हो
सबसे मीठे एहसास मेरे

Thursday, May 5, 2011

बदनाम

तुम्हें याद करना अब तो ये काम हो गया है
दीवाना दिल मुफ्त में बदनाम हो गया है

हमने तो देखा था आँखें उठा के भर
दिल में तुम्हारा इन्तेजाम हो गया है
दीवाना दिल मुफ्त में बदनाम हो गया है

बनकर जो चाह घूमें 'अनाम' ही हम
मजनू मगर अपना नाम हो गया है
दीवाना दिल मुफ्त में बदनाम हो गया है

रस्ते देखे थे जितने भी अब तक सबपे
चर्चा हमारा ही आम हो गया है
दीवाना दिल मुफ्त में बदनाम हो गया है।

Sunday, May 1, 2011

राम जी

मेरा राम जी के मंदिर में जाना जरूरी

राम जी की मैं हूँ सिया
राम जी बिना न लागे हिया
राम नाम का प्रसाद पाना जरूरी
मेरा राम जी के मंदिर में जाना जरूरी

राम जी की मैं छोटी भक्तिन
राम जी को मेरा तन-मन है अरपन
राम जी का मेरे मन में छाना जरूरी
मेरा राम जी के मंदिर में जाना जरूरी