Tuesday, May 31, 2011

शाम

शाम उठती है शाम आती है
रातों में छम-छम शाम चलती है
दिन में सोती है दिन गुजरता है
शाम उठती है शाम आती है

शाम गुलाबी है शाम शराबी है
यौवन ही शाम की खराबी है
चाँद आके जो दस्तक देता है
शाम उठती है शाम आती है

शाम रंगीन है शाम तस्कीन है
सबकी दुआओं में शाम आमीन है
महफ़िल का जब भी समां बंधता है
शाम उठती है शाम आती है

3 comments:

  1. बहुत अच्छे शब्दों से सजाया है शाम को.

    सादर

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  2. आपका स्वागत है "नयी पुरानी हलचल" पर...यहाँ आपके ब्लॉग की किसी पोस्ट की कल होगी हलचल...
    नयी-पुरानी हलचल

    धन्यवाद!

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